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तम के विरुद्ध

by Rajendra Verma

Hindi 150 pages 1 edition

राजेन्द्र वर्मा की ग़ज़लों की भावभूमि परम्परागत ग़ज़लों से नितान्त भिन्न है। इन ग़ज़लों से उन्होंने सत्ता के विद्रूप, अमानवीयता और क्रूरता के मुखौटे को पूरी निर्भीकता के साथ उघाड़ दिया है। इन ग़ज़लों में सियासत के छल-छद्म, दाँव-पेच तथा उसके जनविरोधी चरित्र पर बार-बार चोट की गयी है। ये ग़ज़लें व्यवस्था की विसंगतियों के प्रति अपने आक्रोश और आक्रामकता को जनता के गुस्से और आक्रोश से जोड़कर एक नया तेवर प्रस्तुत करती हैं। राजेन्द्र वर्मा लगातार जनता के दुखों को अपनी ग़ज़लों के मुख्य सरोकार बनाते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इन दुखों के कारणों की तलाश करते हैं। इससे उनका ग़ज़ल लेखन सार्थक और सोद्देश्य लेखन बन जाता है। About The Author राजेन्द्र वर्मा प्रकाशन : आठ ग़ज़ल-संग्रह सहित विभिन्न विधाओं में 40 पुस्तकें प्रकाशित। महत्त्वपूर्ण संकलनों में रचनाएँ सम्मिलित। सम्पादन: हिन्दी ग़ज़ल के हजार शेर, गीत-शती, गीत-गुंजन। साहित्यिक पत्रिका अविरल मंथन (1996-2003)। पुरस्कार-सम्मान आदि : उ.प्र. हिन्दी संस्थान के श्रीनारायण चतुर्वेदी और महावीरप्रसाद द्विवेदी नामित पुरस्कारों सहित देश की कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित। लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा रचनाकार पर एम.फिल. । अनेक शोधग्रन्थों में सन्दर्भित। चुनी हुई कविताओं का अँग्रेज़ी में अनुवाद। एक निबन्ध स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में सम्मिलित ।

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This edition

Publisher Vagdevi Prakashan
ISBN9789380441788
Pages150
FormatPaperback

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1 edition

Vagdevi Prakashan Cover of तम के विरुद्ध, Vagdevi Prakashan edition
Vagdevi Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789380441788
150pages

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Titleतम के विरुद्ध
LanguageHindi
Editions1

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