KitabiBeyond the Bookshelf Get the app
×
Front cover of प्रबुद्ध वर्ग का घातक मौन
Front cover

प्रबुद्ध वर्ग का घातक मौन

by Ravibhushan

Hindi 316 pages 1 edition

PRABUDDH VARG KA GHATAK MOUN (Essays) by Ravibhushan About the Author रविभूषण सम्भवतः 17 दिसम्बर 1946 को बिहार प्रान्त के मुज़फ़्फ़रपुर जिले के गाँव चैनपुर-धरहरवा के एक सामान्य परिवार में जन्मे रविभूषण की प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के आसपास हुई। बिहार विश्वविद्यालय के लंगट सिंह कॉलेज से हिन्दी ऑनर्स (1965) और हिन्दी भाषा-साहित्य में एम.ए. (1967-68)। भागलपुर विश्वविद्यालय से डॉ. बच्चन सिंह के निर्देशन में ‘छायावाद में रंग-तत्त्व’ पर पी-एच.डी. (1985)। नवम्बर 1968 से अध्यापन-कार्य । टी.एन.बी. कॉलेज, भागलपुर में पदस्थापित। भागलपुर विश्वविद्यालय में ही रीडर और प्रोफेसर बने। 1991 में राँची विश्वविद्यालय में स्थानान्तरण। अक्टूबर 2008 में राँची विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त । आलोचनात्मक लेखन का आरम्भ 1971-72 से। 1978-79 से सांस्कृतिक मोर्चे पर सर्वाधिक सक्रिय। पहले ‘नव जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा’ और बाद में ‘जन संस्कृति मंच’ से सम्बद्ध। ‘जसम’ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष । विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन। समय और समाज को केन्द्र में रखकर साहित्य एवं साहित्येतर विषयों पर विपुल लेखन। प्रकाशित पुस्तकें : ‘वैकल्पिक भारत की तलाश’, ‘कहाँ आ गये हम वोट देते-देते ?’, ‘बुद्धिजीवियों की जिम्मेदारी’, ‘फ़ासीवाद की दस्तक’, ‘चित्त में वित्त का वास’ और ‘रामविलास शर्मा का महत्त्व’। कई पुस्तकें शीघ्र प्रकाश्य ।

Get this book

Buy on Amazon.in

As an Amazon Associate, Kitabi earns from qualifying purchases.

This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362013781
Pages316
FormatPaperback

On your shelf?

Track it, log your reading, and lend it to a friend — without losing it. Open in Kitabi

1 edition

Setu Prakashan Cover of प्रबुद्ध वर्ग का घातक मौन, Setu Prakashan edition
Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362013781
316pages

More by Ravibhushan

All works →

Readers also shelved

The facts

Titleप्रबुद्ध वर्ग का घातक मौन
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

Keep the shelf in your pocket

Kitabi is a personal library app — track what you own, log what you read, and lend a book to a friend without losing it. Free, offline-first, no ads.