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लेख-आलेख (प्रेमचन्द और प्रेमचन्दोत्तर कथा-साहित्य)

premchand aur premchandottar katha sahitya

by Nandkishore Naval

Hindi 435 pages 1 edition

lekh-aAlekh : premchand aur premchandottar katha sahitya (Part-IV) by Nandkishore Naval About The Author नंदकिशोर नवल जन्म : 2 सितम्बर, 1937 (चाँदपुरा, वैशाली, बिहार)। निधन : 12 मई 2020 शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), पी-एच.डी. (निराला का काव्य-विकास) । नंदकिशोर नवल प्रमुख मौलिक कृतियाँ: ‘हिन्दी आलोचना का विकास’, ‘मुक्तिबोध : ज्ञान और संवेदना’, ‘निराला : कृति से साक्षात्कार’, ‘मैथिलीशरण’, ‘तुलसीदास’, ‘सूरदास’, ‘रीतिकाव्य’, ‘दिनकर : अर्धनारीश्वर कवि’, ‘समकालीन काव्य-यात्रा’, ‘मुक्तिबोध की कविताएँ : बिम्ब-प्रतिबिम्ब’, ‘पुनर्मूल्यांकन’, ‘शताब्दी की कविता’, ‘निराला-काव्य की छवियाँ’, ‘कविता के आर-पार’, ‘कविता: पहचान का संकट’, ‘निकष’, ‘रचनालोक’, ‘आधुनिक हिन्दी कविता का इतिहास’, ‘हिन्दी कविता: अभी, बिल्कुल अभी’, ‘लेख आलेख (आलोचना के प्रश्न) खण्ड-1’। प्रमुख सम्पादित कृतियाँ: ‘निराला रचनावली’ (आठ खण्ड), ‘दिनकर रचनावली’ (आरम्भिक पाँच काव्य-खण्ड), ‘मैथिलीशरण संचयिता’, ‘नामवर संचयिता’, ‘स्वतन्त्रता पुकारती’, ‘मुक्तिबोध कवि-छवि’, ‘निराला : कवि-छवि’, ‘हिन्दी साहित्य-शास्त्र’, ‘छायान्तर’, ‘सन्धि-वेला’, ‘अन्त-अनन्त’, ‘कामायनी परिशीलन’, ‘खुल गया है द्वार एक’, ‘हिन्दी की कालजयी कहानियाँ’, ‘बीसवीं शती: कालजयी साहित्य’, ‘पदचिह्न’। मुख्य सम्पादित पत्रिकाएँ: ‘ध्वजभंग’, ‘सिर्फ’, ‘धरातल’, ‘उत्तरशती’, ‘कसौटी’, ‘आलोचना’ (सह-सम्पादक के रूप में)। अपूर्वानंद आलोचना अपूर्वानंद का व्यसन है। आलोचना अपने व्यापक अर्थ और आशय में। आलोचना का लक्ष्य पूरा मानवीय जीवन है, साहित्य जिसकी एक गतिविधि है। इसलिए शिक्षा, संस्कृति और राजनीति की आलोचना के बिना साहित्य की आलोचना सम्भव नहीं। हिन्दी-अँग्रेजी की अनेक सम्पादित पुस्तकों के अतिरिक्त ‘सुंदर का स्वप्न’, ‘साहित्य का एकांत’ तथा प्रेमचन्द पर एक किताब ‘यह प्रेमचन्द हैं’ और मुक्तिबोध पर ‘मुक्तिबोध की लालटेन’ प्रकाशित। कुछ समय तक ‘आलोचना’ पत्रिका का सम्पादन। पेशे से अध्यापक हैं। अभी दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से सम्बद्ध हैं। योगेश प्रताप शेखर जन्म : 27 जून 1979 ई. शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. हिन्दी (पटना विश्वविद्यालय) प्रकाशन : ‘हिन्दी के रचनाकार आलोचक’ किताब प्रकाशित। ‘आलोचना’, ‘तद्भव’, ‘समास’, ‘हंस’, ‘आजकल’, ‘पाखी’, ‘पुस्तक-वार्ता’ आदि पत्रिकाओं में लेख एवं समीक्षाएँ। ‘द वायर’, ‘सत्य हिन्दी’, ‘जानकीपुल’, ‘न्यूजलॉण्ड्री’ आदि ऑनलाइन पोर्टल पर लेख। सम्प्रति : दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय, गया (बिहार) में सहायक प्राध्यापक ।

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This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362010230
Pages435
FormatPaperback

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1 edition

Setu Prakashan Cover of लेख-आलेख (प्रेमचन्द और प्रेमचन्दोत्तर कथा-साहित्य), Setu Prakashan edition
Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362010230
435pages

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Titleलेख-आलेख (प्रेमचन्द और प्रेमचन्दोत्तर कथा-साहित्य)
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

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