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जिनके साथ जिया मैं

by Vibhuti Narayan Rai

Hindi 107 pages 1 edition

JINKE SAATH JIYA MEIN (Memoirs) by Vibhuti Narayan Rai About the Author 28 नवम्बर 1950 को जन्मे विभूति नारायण राय 1971 में अँग्रेजी से एमए करने और कुछ समय अध्यापन के बाद 1975 में भारतीय पुलिस सेवा के सदस्य बने। 2008 से 2014 तक महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त राय को सराहनीय सेवाओं के लिए इण्डियन पुलिस मेडल और राष्ट्रपति का पुलिस मेडल भी मिला। छह उपन्यास ‘घर’, ‘शहर में कर्फ्यू’, ‘किस्सा लोकतंत्र’, ‘तबादला’, ‘प्रेम की भूतकथा’ और ‘रामगढ़ में हत्या’ प्रकाशित। सभी उपन्यासों का अँग्रेजी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद। ‘रणभूमि में भाषा’, ‘फेंस के उस पार’, ‘किसे चाहिए सभ्य पुलिस’, ‘अंधी सुरंग में काश्मीर’, ‘पाकिस्तान में भगतसिंह’, ‘कुछ खादी की, कुछ खाकी की’ (लेखों के संग्रह) तथा व्यंग्यलेखों का संग्रह ‘एक छात्र नेता का रोजनामचा’ प्रकाशित। स्तम्भलेखन। ‘मेरे साक्षात्कार’ शीर्षक से साक्षात्कारों का प्रकाशन। नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद द्वारा प्रदत्त फेलोशिप के तहत दंगों के दौरान पुलिस की छवि पर शोध, जिसके फलस्वरूप पुस्तक ‘साम्प्रदायिक दंगे और भारतीय पुलिस’ आयी। मेरठ के दंगों (1987) पर ‘हाशिमपुरा 22 मई’ प्रकाशित। इसका भी कई भाषाओं में अनुवाद। उपन्यास ‘तबादला’ पर इंदु शर्मा कथा सम्मान, उपन्यास ‘क़िस्सा लोकतंत्र’ उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा सम्मानित, सफ़दर हाशमी सम्मान, राहुल सांकृत्यायन सम्मान, कमलेश्वर सम्मान, उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान, राही मासूम रजा सम्मान। लगभग दो दशक तक ‘वर्तमान साहित्य’ का सम्पादन। ‘कथा साहित्य के सौ बरस’ का सम्पादन।

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This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362017802
Pages107
FormatPaperback

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1 edition

Setu Prakashan Cover of जिनके साथ जिया मैं, Setu Prakashan edition
Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362017802
107pages

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Titleजिनके साथ जिया मैं
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

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