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इस आबाद ख़राबे में

by Akhtarul Iman

Hindi 292 pages 1 edition

Is Abaad Kharabe Mein by Akhtarul Iman About the Author/Translator अख्तरुल ईमान (जन्म 12 नवम्बर, 1915-मृत्यु 9 मार्च 1996) ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा बिजनौर में ही पूरी की, जहाँ वे कवि और विद्वान् खुर्शीद उल इस्लाम के सम्पर्क में आए, जो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे। इस संगति का उनपर गहरा प्रभाव पड़ा। उर्दू साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी करने के बाद, ईमान ऑल इण्डिया रेडियो में एक स्टाफ कलाकार के रूप में शामिल हो गये और बाद में 1945 में एक संवाद लेखक के रूप में फिल्मिस्तान स्टूडियो चले गये। उनकी कविता में दार्शनिक गहराई, मानवतावाद, यथार्थवाद और गीतात्मकता का अनूठा मिश्रण है। उनकी प्रारम्भिक साहित्यिक कृतियाँ ‘गिर्दाब’ (1943), ‘आबजू’ (1944) और ‘तारीख सय्यारा’ (1946) के रूप में प्रकाशित हुईं। उनकी कुछ अन्य पुस्तकों में ‘बिंत-ए-लम्हात’ (1969), ‘नया आहंग’ (1977), ‘सरो-सामां’ (1982), और ‘जमीन जमीन’ (1983) शामिल हैं। उनका सम्पूर्ण काव्य ‘कुल्लियात-ए-अख्तर-उल-ईमान’ नाम से 2000 में प्रकाशित हुआ था। अब (2025) इसका संशोधित एवं परिवर्द्धित संस्करण सेतु प्रकाशन से प्रकाशित। फिल्मिस्तान स्टूडियो में एक संवाद लेखक के रूप में ईमान की पहली फिल्म नजम नक़वी की ‘पराई आग’ (1948) थी, जिसके बाद ‘बिखरे मोती’ (1951), ‘रंगीली’ (1952), ‘कश्ती’ (1954), ‘रफ़्तार’ (1955), ‘मुजरिम’ (1958), ‘कैदी नम्बर 911’ (1958), ‘बारूद’ (1960), ‘कल्पना’ (1960) आयी। अख्तरुल ईमान ने 1960 से 1980 तक बी. आर. फ़िल्म्स के लिए एक सिने लेखक के रूप में भी काम किया। उन्होंने ‘क़ानून’ (1960) जैसी फ़िल्में लिखी। इसके अलावा कुछ फ़िल्मों के लिए गीत भी दिये। अनिल माहेश्वरी जन्म : मेरठ; पचास वर्ष का पत्रकारिता का अनुभव; ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से विशेष संवाददाता के पद से सेवानिवृत्त । अँग्रेजी में ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी : इंस्टीट्‌यूशन ऑफ लर्निंग ऑर आइडेण्टिटी’, ‘पोलराइज्ड टाइम्स : लिविंग इन इण्डिया टुडे’, ‘कम्पल्सिव नोज पिकिंग एण्ड अदर टू टेल्स’, ‘मून स्टिल शाइंस : एन एनवायर्नमेण्टल इशू’, ‘राइट टु इनफॉर्मेशन : ए नो-विन सिचुएशन’ सहित सामयिक विषयों पर एक दर्जन से अधिक किताबों का प्रकाशन। हिन्दी में ‘मस्लक-ए-आला हजरत बरेलवी’, ‘… हाजिर हों : आधुनिक न्यायिक दायरे में रामायण की पुनर्यात्रा’; हिन्दी में अनुवाद कार्य-‘सभ्यता के कोने’ (वेरियर एल्विन और भारतीय आदिवासी समाज), ‘दी रिपब्लिक’ (प्लेटो कृत)। सम्प्रति : नोएडा में निवास एवं स्वतन्त्र लेखन । अतिथि प्रोफेसर : चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना।

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This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362019318
Pages292
FormatPaperback

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1 edition

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Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362019318
292pages

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Titleइस आबाद ख़राबे में
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

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