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घिर गया है समय का रथ

by Ravindra Shobhne

Translated by Dr. Sarjooprasad Mishra

Hindi 256 pages 1 edition

GHIR GAYA HAI SAMAY KA RATH by Ravindra Shobhne About The Author रवीन्द्र शोभणे जन्म : 15 मई 1959. कहानी, उपन्यास, आलोचना, ललित लेखन, सम्पादन, व्यक्तित्व-चित्रण आदि विभिन्न विधाओं में सहजता से अपने लेखन के जरिये अपनी मुहर लगाने वाला मराठी साहित्य की दुनिया का एक महत्त्वपूर्ण नाम। खरसोली (ता. नरखेड, जिला नागपुर) में बिल्कुल साधारण परिवार में जन्म। विद्यार्थी जीवन से ही लेखन की शुरुआत। 1983 में ‘प्रवाह’ नाम से पहला उपन्यास प्रकाशित। अब तक ग्यारह उपन्यास, आठ कहानी संकलन, छह आलोचनात्मक किताबों के साथ मराठी साहित्य में बेहतरीन योगदान। अपने लेखन के जरिये मानवी रिश्तों की जटिलता, इंसानी रिश्तों में उभरने वाले परिवर्तनों की खोज, बाहरी वास्तविकता के आक्रमण से मानवी भावविश्व में होने वाली मूल्यों और आदर्शों की गिरावट आदि बातें उनके लेखन की विशेषताएँ हैं। जीवन की वास्तविकता को गहरे और चिन्तनशील स्तर पर निरन्तर खोजना यह रवीन्द्र शोभणे जी के लेखन का मूलधर्म है। मराठी साहित्य में श्रेष्ठ रचनाकारों को दिये जाने वाले महाराष्ट्र शासन के सर्वोच्च पुरस्कार विंदा करंदीकर जीवन गौरव पुरस्कार से सम्मानित। कहानी, उपन्यास और आलोचना, इन विधाओं में महत्त्वपूर्ण लेखन के लिए अन्य कई महत्त्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित। सन् 2024 में अमलनेर (जि. जळगांव) में सम्पन्न हुए 97वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता से गौरवान्वित ।

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This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362015549
Pages256
FormatPaperback

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1 edition

Setu Prakashan Cover of घिर गया है समय का रथ, Setu Prakashan edition
Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362015549
256pages

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Titleघिर गया है समय का रथ
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

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