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दूब

by Hariyash Rai

Hindi 228 pages 1 edition

DOOB (Novel) by Hariyash Rai दूर्वा के मन में अक्सर यह सवाल आता था कि क्या वह कॉरपोरेट दुनिया में काम करते हुए सुखी रह पायी है? क्या उसका पति तरुण वर्मा सुखी रह पाया है ? कॉरपोरेट की नौकरी से उसे पैसा तो मिला, पर सुख कतई नहीं मिला। वह बारिश आते ही अपने आफिस से छुट्टी लेकर कालका से अपने गाँव धर्मपुर तक नयी बनी सड़क के दोनों ओर कर्नल बग्गा की संस्था नवरचना के साथ मिलकर नीम के पौधे लगाने की कोशिश करेगी। धीरे-धीरे वे बड़े होकर छायादार पेड़ों में बदल जाएँगे। यहाँ की लड़ाई अपने बेटे को पाने की थी, वहाँ की लड़ाई अपने उजड़े हुए इलाके को फिर से हरा-भरा करने की है। सुगन्धा की तरह कुछ ऐसा करेगी जिसका कुछ मतलब हो, जो लोगों के दुखों को कुछ कम कर सके, उन्हें अपना वजूद साबित करने में कुछ मदद कर सके। – इसी पुस्तक से About The Author हरियश राय हिन्दी कथाकारों की अग्रिम पंक्ति में शामिल हरियश राय पिछले तीन दशकों से कथा-लेखन में सक्रिय हैं। वे अपने समय के जीवन-यथार्थ को गहरे मानवीय सरोकारों के साथ दर्ज करते हैं; सहजता और सादगी इनकी रचनाओं की खास पहचान है। कृतियाँ : नागफनी के जंगल में, मुट्ठी में बादल, दहन, माटी राग (उपन्यास); बर्फ होती नदी, उधर भी सहरा, अन्तिम पड़ाव, वजूद के लिए, सुबह-सवेरे, किस मुकाम तक, महीफल, कलम (कहानी संग्रह)। हरियश राय ने ‘भीष्म साहनी सादगी का सौन्दर्यशास्त्र’ व ‘कथा-कहानी-एक’ नाम से दो किताबों का सम्पादन भी किया है। उनकी अन्य प्रकाशित कृतियाँ हैं- ‘समय के सरोकार’, ‘शिक्षा, भाषा और औपनिवेशिक दासता’, ‘कथा : एक यात्रा’, ‘कथा-सान्निध्य’ व ‘कहानी: आज’। हिन्दी के प्रतिनिधि कथा-संग्रहों में उनकी कहानियाँ शामिल हैं। उनकी कहानियाँ उर्दू, तेलुगु, ओड़िया, गुजराती, पंजाबी, मैथिली भाषाओं में अनूदित हैं।

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This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362017420
Pages228
FormatPaperback

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Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362017420
228pages

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Titleदूब
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

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