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चीनी दर्शन का संक्षिप्त इतिहास

by Fung Yu-Lan

Translated by Anand Swaroop Verma

Hindi 534 pages 1 edition

CHINI DARSHAN KA SANKSHIPT ITIHAS by Fung Yu-Lan (Translated by Anand Swaroop Verma) फङ यओ-लान फङ यओ-लान का जन्म चीन के हेनान प्रान्त के हेटांग काउण्टी में साल 1895 में हुआ। वे आधुनिक चीनी दर्शन के एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उन्हें दर्शन के क्षेत्र में गहन अन्तर्दृष्टि और बौद्धिक योगदान के लिए जाना जाता है। उनकी शिक्षा-दीक्षा पारम्परिक तौर पर चीन में ही हुई, लेकिन अमेरिका में अध्ययन के दौरान फङके बौद्धिक दायरे का काफी विस्तार हुआ। वहीं पर उन्होंने पश्चिमी दर्शन को जाना समझा। चीन लौटने के बाद उन्होंने पेकिंग और शिंधुआ विश्वविद्यालयों में अहम जिम्मेदारियाँ सँभालीं। जापान-विरोधी युद्ध के उथल- पुथल भरे दौर के बीच दार्शनिक जगत में उन्होंने काफी योगदान दिया। चीनी दार्शनिक इतिहास पर उन्होंने तीन प्रभावशाली किताबें लिखी हैं, जो उनका बेहद मौलिक काम है-‘ए हिस्ट्री ऑफ चाइनीज फिलॉसफी’, ‘ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ़ चाइनीज फिलॉसफी’ और ‘ए न्यू हिस्ट्री ऑफ चाइनीज फिलॉसफी’। इन किताबों ने चीन के अन्दर और पूरी दुनिया में चीनी विचार और दर्शन के अध्ययन को एक नया मकाम दिया। इसके अलावा, आधुनिक चीनी दर्शन पर ‘न्यू कनफ्यूशियनिज्म’ और ‘ऑन न्यू थिंग्स’ जैसी छह खण्डों में लिखी गयी किताबों के जरिये अपने दौर में उन्होंने दार्शनिक के तौर पर अपनी प्रतिष्ठा में काफी इजाफा किया। पूर्वी और पश्चिमी दार्शनिक परम्पराओं को जोड़ने की फङ की अनूठी काबिलियत ने उन्हें पश्चिमी अकादमिक जगत में पहले कद्दावर आधुनिक चीनी दार्शनिक के रूप में पहचान दिलायी। ‘ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ चाइनीज फिलॉस- फी’ उनका एक महत्त्वपूर्ण काम है, जो मूल रूप से 1948 में अँग्रेजी में प्रकाशित हुआ। यह चीनी दार्शनिक विचार के विकास पर सुस्पष्ट और गहन दृष्टिकोण पेश करता है और आज भी स्कॉलर और छात्रों के लिए यह बेहद महत्त्वपूर्ण पाठ बना हुआ है। फङ का निधन 1990 में हुआ। आनन्द स्वरूप वर्मा आनन्द स्वरूप वर्मा पेशे से लेखक-पत्रकार। 1966 से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में काम किया। 1970-74 तक आकाशवाणी दिल्ली के हिन्दी समाचार विभाग से सम्बद्ध रहे। 1970 से 1975 तक साप्ताहिक ‘दिनमान’ में नियमित लेखन किया। जनपक्षीय पत्रकारिता और वैकल्पिक मीडिया विकसित करने के उद्देश्य से 1980 में ‘समकालीन तीसरी दुनिया’ का सम्पादन-प्रकाशन शुरू किया। 1994 में दक्षिण अफ्रीका के प्रथम जनतान्त्रिक चुनाव की दैनिक ‘जनसत्ता’ में रिपोर्टिंग की। लगभग पाँच वर्षों तक ‘जनसत्ता’ में समाचार-विचार नाम से मीडिया पर एक साप्ताहिक कॉलम लिखा। 1990 के दशक के प्रारम्भिक वर्षों में दिल्ली यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (डीयूडब्ल्यूजे) के अध्यक्ष रहे। अनेक महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का सम्पादन व अनुवाद किया : आज का भारत (रजनी पामदत्त), भारत का स्वाधीनता संग्राम (ई.एम.एस. नम्बूदिरिपाद), भारतीय जेलों में पाँच साल (मेरी टायलर), प्राचीन भारत में राजनीतिक हिंसा (उपिंदर सिंह), माओ त्सेतुङ का राजनीतिक दर्शन (मनोरंजन मोहन्ती), औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति (न्गुगी वा थ्योंगों), तीसरी फसल (पी. साईनाथ), भारत में बंधुआ मजदूर (महाश्वेता देवी), तानाशाह की कैद में (केन सारो-वीवा), लाल पोस्ते के फूल (अलाए), हिंसा (फेस्टस इयायी), अमिल्कर कबराल जीवन-संघर्ष और विचार आदि एवं पत्रकारिता का अन्धा युग पुस्तक का लेखन।

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This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362019349
Pages534
FormatPaperback

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1 edition

Setu Prakashan Cover of चीनी दर्शन का संक्षिप्त इतिहास, Setu Prakashan edition
Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362019349
534pages

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Titleचीनी दर्शन का संक्षिप्त इतिहास
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

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