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Front cover of भारतीय चिन्तन परम्परा और भीमराव आंबेडकर
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भारतीय चिन्तन परम्परा और भीमराव आंबेडकर

by Niranjan Sahay

Hindi 262 pages 1 edition

Bharatiya Chintan Parampara Aur Bheemrao Ambedkar by Niranjan Sahay वास्तव में दलित चेतना एक प्रति-सांस्कृतिक चेतना होने के साथ-साथ एक वैकल्पिक चेतना भी है, जिसकी जड़ में भारतीय सामाजिक संरचना विद्यमान है। इसका आधार सिर्फ जाति ही नहीं थी बल्कि इसे शताब्दियों तक धार्मिक वैधता भी प्रदान की जाती रही है। इसके चलते ही बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर ने इससे दलित समाज को मुक्ति दिलाने हेतु बौद्ध धम्म को आधार बनाया और भारतीय संविधान की एक ऐसी समतामूलक परिकल्पना प्रस्तुत की जिसमें इस सामाजिक तथा वैचारिक जातिगत कोढ़ का उपचार किया जाना सम्भव हो। दलित-मुक्ति आन्दोलन में आंबेडकर के करिश्माई नेतृत्व के योग ने भारतीय लोकतान्त्रिक समझ को सच्चे अर्थों में मानवीय सरोकारों और प्रगतिवादी समझ से सम्पन्न किया। डॉ. आंबेडकर ने उत्पीड़ित और वंचित जीवन के दंश को बखूबी समझा था। अनुभव की इस तपन को उन्होंने जीवन के सरोकारों में शामिल किया और वैधानिक प्रावधानों में उन्हें शामिल कराकर भारतीय लोकतन्त्र की जवाबदेही उनके प्रति तय की जिन्हें मानवाधिकारों से वंचित कर सामाजिक एवं आर्थिक स्तर पर नकारकर हाशिये पर धकेल दिया गया था। About The Author निरंजन सहाय अध्येता, आलोचक, शिक्षाविद् और भारतीय ज्ञान-परम्परा के गम्भीर शोधकर्ता हैं। काव्यशास्त्र एवं साहित्यालोचन (2007) तथा केदारनाथ सिंह और उनका समय (2008) से आरम्भहुई उनकी लेखकीय यात्रा शिक्षा और सरोकार, आत्मानुभूति के दायरे, प्रपद्यवाद और नलिन विलोचन शर्मा, शिक्षा की परिधि, जनसंचार माध्यम और विशेष लेखन, कार्यालयी हिन्दी और कम्प्यूटर अनुप्रयोग, हिन्दी काव्य, हिन्दी गद्य: स्वरूप, इतिहास एवं चयनित रचनाएँ, महादेवी वर्मा : सृजन और सरोकार तथा योग दर्शन : ज्ञान का अक्षय भंडार जैसी चर्चित कृतियों तक निरन्तर विस्तृत हुई है। उन्हें रमन अग्रवाल साहित्य पुरस्कार (2018), राष्ट्रीय शिक्षा नीति विस्तार शिक्षक सम्मान (2021), डॉ. अम्बेडकर साहित्य श्री नेशनल अवॉर्ड (2022) तथा साहित्य गौरव सम्मान (2022) सहित अनेक सम्मानों से नवाजा गया है। सम्प्रति वे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग में प्राध्यापक तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसन्धान परिषद (ICSSR) की अनुदैर्ध्य परियोजना ‘ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीय श्रमिक प्रवास का सांस्कृतिक इतिहास’ के परियोजना समन्वयक हैं।

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This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362010216
Pages262
FormatPaperback

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1 edition

Setu Prakashan Cover of भारतीय चिन्तन परम्परा और भीमराव आंबेडकर, Setu Prakashan edition
Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362010216
262pages

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Titleभारतीय चिन्तन परम्परा और भीमराव आंबेडकर
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

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