KitabiBeyond the Bookshelf Get the app
×
Front cover of अयाची की खोज में
Front cover

अयाची की खोज में

by Bibhutibhushan Mukhopadhyaya

Translated by Mritunjay

Hindi 184 pages 1 edition

AYACHI KI KHOJ MEIN (Novel) by Bibhutibhushan Mukhopadhyaya Translated by Mritunjay About The Author बिभूतिभूषण मुखोपाध्याय जन्म : 24 अक्टूबर सन् 1894, दरभंगा जिले के पण्डौल गाँव में। निधन : दरभंगा में 30 जुलाई सन् 1987 को। आदि निवास : हुगली जिले के चतरा में। दरभंगा राज स्कूल से मैट्रिक, रिपन कॉलेज से आई.ए. और पटना के बी.एन. कॉलेज से बी.ए.। कर्म-जीवन (1916-42) में विभिन्न स्कूलों में अध्यापन, धनी परिवारों में गृह-शिक्षक, दरभंगा महाराज के निजी सचिव, राज प्रेस और ‘इण्डियन नेशन’ पत्रिका के प्रबन्धक रहे। 1364 बंगाब्द में सुरेशचन्द्र स्मृति पुरस्कार, कलकत्ता विश्वविद्यालय का शरत् स्मृति पुरस्कार (1957), जगत्तारिणी पदक (1976), ‘डी. एल. राय रीडरशिप’ व्याख्याता (1975), 1972 में रवीन्द्र पुरस्कार, विश्वभारती का ‘देशिकोत्तम’ (1987), बर्धमान विश्वविद्यालय से डी.लिट. (1986)। इसके अतिरिक्त बंगीय साहित्य परिषद् और अन्य संस्थाओं से अनेक पुरस्कार प्राप्त। मृत्युंजय बिहार के रोहतास जिले के सोनबरसा ग्राम में जन्मे मृत्युंजय कुमार सिंह समकालीन भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक कूटनीति के एक विशिष्ट हस्ताक्षर हैं। कवि, लेखक, गीतकार, नाटककार, लोकगायक और 1987 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी के रूप में उनका व्यक्तित्व प्रशासन, साहित्य, संगीत और अन्तरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद के समन्वय का उदाहरण है। भारतीय दूतावास, जकार्ता में काउंसलर (संस्कृति) रहते हुए उन्होंने 2009-10 के ‘फेस्टिवल ऑफ इण्डिया इन इण्डोनेशिया’ का सफल क्यूरेशन किया और भारत-इण्डोनेशिया के बीच स्थायी सांस्कृतिक सेतु निर्मित किया। उनकी लिखित नृत्य-नाट्य कृतियाँ ‘शिखण्डिनी’ और ‘सागरिका’ भारतीय शास्त्रीय परम्परा तथा जावा-बाली नृत्य-संवेदना के अभिनव संगम के लिए विशेष रूप से चर्चित रहीं। एक गीतकार के रूप में उनके गीत ऋतुपर्णो घोष की उल्लेखनीय फिल्मों’ चोखेर बाली’ और ‘अन्तर्महल’ सहित अनेक चर्चित फिल्मों में प्रयुक्त हुए हैं। ICCR द्वारा अनुमोदित भोजपुरी लोकगायक के रूप में उन्होंने मॉरीशस, गुयाना सहित अनेक देशों में भारतीय लोकधारा को स्वर दिया है। भोजपुरी उपन्यास ‘गंगा रतन बिदेसी’ और खण्डकाव्य ‘द्रौपदी’ उनकी महत्त्वपूर्ण कृतियाँ हैं। सम्प्रति वे KIFALC (कोलकाता इण्टरनेशनल फाउण्डेशन फॉर आर्ट, लिटरेचर एण्ड कल्चर) और ‘यापनचित्र’ के न्यासी के रूप में कला, साहित्य और संस्कृति के वैश्विक संवाद को नयी दिशाएँ दे रहे हैं।

Get this book

Buy on Amazon.in

As an Amazon Associate, Kitabi earns from qualifying purchases.

This edition

Publisher Setu Prakashan
ISBN9789362014269
Pages184
FormatPaperback

On your shelf?

Track it, log your reading, and lend it to a friend — without losing it. Open in Kitabi

1 edition

Setu Prakashan Cover of अयाची की खोज में, Setu Prakashan edition
Setu Prakashan
Hindi · Paperback
—ISBN 9789362014269
184pages

Readers also shelved

The facts

Titleअयाची की खोज में
TranslatorsMritunjay
LanguageHindi
Editions1
PublishersSetu Prakashan

Keep the shelf in your pocket

Kitabi is a personal library app — track what you own, log what you read, and lend a book to a friend without losing it. Free, offline-first, no ads.