आत्मसम्भवा आण्डाल
by Subhash Rai
Hindi 432 pages 1 edition
AATMASAMBHAVA AANDAL (Criticism) by Subhash Rai About The Author सुभाष राय जन्म जनवरी १९५७ में उत्तर प्रदेश के एक गाँव बड़ागाँव (मऊ) में। प्रारम्भिक पढ़ाई-लिखाई गाँव की पाठशाला में। आगरा विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध साहित्य संस्थान के. एम.आई. से हिन्दी भाषा और साहित्य में स्नातकोत्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। वहीं से विधि की पढ़ाई पूरी की और उत्तर भारत के विख्यात सन्त कवि दादूदयाल के रचना-संसार पर डाक्टरेट पूरी की। आपातकालीन ज़्यादतियों के ख़िलाफ़ आन्दोलन, जेलयात्रा। चार दशकों से पत्रकारिता। कई प्रतिष्ठित दैनिक समाचारपत्रों में शीर्ष ज़िम्मेदारियाँ सँभालने के बाद इस समय लखनऊ में जनसन्देश टाइम्स के प्रधान सम्पादक के रूप में कार्यरत। मासिक साहित्यिक पत्रिका ‘समकालीन सरोकार’ का एक वर्ष तक सम्पादन। दो कविता संग्रह’ सलीब पर सच’ और ‘मूर्तियों के जंगल में’, एक निबन्ध संग्रह ‘जाग मछन्दर जाग’, संस्मरण एवं आलोचनात्मक लेखों का एक संग्रह ‘अँधेरे के पार’ और ‘दिगम्बर विद्रोहिणी अक्क महादेवी’ प्रकाशित। नयी धारा रचना सम्मान, माटी रतन सम्मान एवं देवेन्द्र कुमार बंगाली स्मृति कविता सम्मान, स्पन्दन कृति आलोचना सम्मान से सम्मानित ।
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